उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने ₹20 के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह यूपी, पंजाब, बिहार, हरियाणा सहित कई राज्यों में सक्रिय था। पुलिस का दावा है कि गिरोह ने अब तक लगभग ₹70 करोड़ मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चला दिए थे।
घटना और गिरफ्तारी
13 सितंबर 2026 (रविवार) को सहारनपुर की नगर कोतवाली पुलिस, एसओजी (Special Operations Group) और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई तीतरों/जुबली पार्क इलाके में हुई, जहां आरोपी नई फैक्ट्री लगाने के लिए मशीनें ले जा रहे थे।
- उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह* (सरगना) — मोहाली (पंजाब) निवासी। उम्र लगभग 50 साल। पहले सुनार/ज्वेलरी का काम करते थे।
- हिमांशु उर्फ गुल्लू — सहारनपुर (बरसी)
- कुलदीप — मुजफ्फरनगर/सहारनपुर (आवास विकास)
- संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन — मधुबनी (बिहार)
- अनुराग पाल उर्फ लंकेश — भदोही/संत रविदास नगर (यूपी)
गिरोह में कुल लगभग 8 सदस्य बताए जा रहे हैं। बाकी की तलाश जारी है।
बरामदगी
- ₹20 के 6,400 नकली सिक्के (मूल्य लगभग ₹1.28 लाख)
- लगभग ₹5 लाख मूल्य के अधबने (अधूरे) सिक्के
- 6 मशीनें (सिक्के बनाने वाली)
- 5 लोहे की डाई, 39 बिना मुहर वाली डाई, 20 मुहर लगी डाई
- डाई पॉलिश मशीन, घिसाई के पत्थर, अन्य उपकरण
- 2 कारें, 8 मोबाइल फोन, 7 रजिस्टर (हिसाब-किताब वाले), कुछ असली नोट
- उत्पादन क्षमता : रोज 10,000 से 12,000 नकली सिक्के बनाने की क्षमता।
- लागत और मुनाफा: एक सिक्का बनाने में ₹5-6 खर्च। एजेंटों को ₹12-15 में बेचा जाता था। बाजार में पूरा ₹20 चलता था।
- खपाने का तरीका: मुख्य रूप से शराब के ठेकों पर (सबसे बड़ा बाजार), टोल प्लाजा, किराना दुकानों और छोटे व्यापारियों के जरिए। कमीशन आधारित सिस्टम था (जैसे ₹4,000 के सिक्के चलाने पर ₹400 कमीशन)।
- फैक्ट्री: पहले हरियाणा के सोनीपत (राई इंडस्ट्रीयल एरिया) में फैक्ट्री चल रही थी। दिल्ली पुलिस के दबाव में 10 सितंबर के आसपास वहां की फैक्ट्री समेट ली गई और सहारनपुर में नई यूनिट लगाने की तैयारी चल रही थी।
- नेटवर्क: यूपी, पंजाब, बिहार, हरियाणा मुख्य रूप से। कुछ रिपोर्ट्स में झारखंड और अन्य राज्यों का भी जिक्र है। सरगना उपकार लूथरा 2001 से इस धंधे में सक्रिय थे। 2017 में दिल्ली पुलिस ने उन्हें ₹1 लाख के इनाम पर गिरफ्तार किया था। तिहाड़ जेल में ही कुछ सहयोगियों से मुलाकात हुई थी।
एसएसपी अभिनंदन सिंह ने बताया कि बरामद रजिस्टरों और मोबाइल्स से पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। अन्य सदस्यों और सप्लाई चेन की जांच जारी है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच भी चल रही है।
यह मामला सहारनपुर में हाल ही में हुए ₹17.29 करोड़ के नकली नोटों के मामले (पीएनबी करेंसी चेस्ट) के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिससे जिले में नकली मुद्रा के मामलों पर पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है।
