रियाद/बगदाद, 12 सितंबर 2026: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन (East-West Oil Pipeline) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इराक से लॉन्च किए गए कई ड्रोन ने पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमलों में कई लोग घायल हुए और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि तेल पाइपलाइन और समुद्री मार्गों पर संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो इसके कई प्रभाव हो सकते हैं:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
तेल आयात करने वाले देशों का आयात बिल बढ़ सकता है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
समुद्री परिवहन और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और राजनयिक टकराव बढ़ सकता है।
हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कितनी वृद्धि होगी, यह अभी निश्चित नहीं है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, रुपये की विनिमय दर, सरकारी नीतियों और घरेलू तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले और उसके बाद अस्थायी बंदी ने मध्य पूर्व के ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है। इराक ने जांच शुरू कर दी है, जबकि सऊदी अरब ने फिलहाल संयम बरतने का फैसला किया है। इस बीच तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना दुनिया भर के लिए चिंता का विषय बन गया है।
अगर पाइपलाइन और समुद्री तेल मार्गों पर संकट जारी रहा, तो आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है
