मेरठ। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामले ने एक बार फिर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मृतक सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आए इस फैसले को वकील कृष्ण कुमार दुबे ने ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि पूरे देश की निगाहें इस मामले पर टिकी थीं और हर कोई जानना चाहता था कि अदालत इस जघन्य हत्याकांड में दोषियों को क्या सजा सुनाती है।
वकील कृष्ण कुमार दुबे के मुताबिक, अदालत का फैसला अपराध की गंभीरता और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आया है। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने भी अदालत में अपनी दलीलें रखीं, लेकिन अभियोजन पक्ष के साक्ष्य इतने मजबूत और स्पष्ट थे कि अदालत ने उन्हें महत्वपूर्ण माना।
महिला को मृत्युदंड सुनाया जाना भी चर्चा का विषय
कृष्ण कुमार दुबे ने कहा कि इस मामले में एक महिला को भी मौत की सजा सुनाया जाना देश की न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इस फैसले पर केवल मेरठ या उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नजरें थीं। लोग यह देखना चाहते थे कि इतने चर्चित और गंभीर अपराध में अदालत किस तरह का फैसला सुनाती है।
उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद दोनों स्तब्ध नजर आए। मौत की सजा का सामना करने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, सजा सुनाना अदालत का अधिकार है और उसका आधार मामले में सामने आए तथ्य, साक्ष्य तथा कानून होते हैं।
अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को बताया अहम
वकील के अनुसार, बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि हत्या की वारदात का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। इसके अलावा दोनों दोषियों की बेटियां होने का मुद्दा भी सजा के दौरान उठाया गया। लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और घटनाक्रम की कड़ियों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
दुबे ने कहा कि मामले की गंभीरता का प्रमुख आधार हत्या की सुनियोजित प्रकृति और वारदात के बाद शव को छिपाने की कोशिश थी। उनके मुताबिक, अदालत ने पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोषियों को कड़ी सजा सुनाई।
क्या है मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?
यह मामला सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है, जिनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप था। पुलिस के खुलासे के अनुसार, मार्च 2025 में सौरभ की हत्या करने के बाद उनके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में सीमेंट के साथ छिपाया गया। शव मिलने के बाद यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई थी।
मामले की जांच और सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
फैसले से जुर्माने की सजा भी
रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने मृत्युदंड के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के दौरान अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा गया।
देशभर में चर्चा में रहा मामला
नीला ड्रम हत्याकांड अपनी भयावह प्रकृति और शव को छिपाने के तरीके के कारण लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। इस मामले में अदालत के फैसले को लेकर पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी। कृष्ण कुमार दुबे ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस मामले में पूरे देश की निगाहें न्यायालय पर टिकी हुई थीं।
