कोलकाता: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अधिकारियों ने हद पार कर दी। पूर्व मेदिनीपुर में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के दौरान एक नागरिक की दो मंजिला वैध व्यावसायिक इमारत भी गिरा दी गई। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कबिता मन्ना और एक अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि तमलुक के नाइकुरी जगन्नाथचक स्थित उनके स्वामित्व वाले एलआर प्लॉट नंबर 650 पर बनी व्यावसायिक इमारत को अतिक्रमण हटाने की आड़ में अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इमारत बिष्णुबर-1 ग्राम पंचायत से स्वीकृत प्लान के अनुसार बनाई गई थी और उसमें व्यवसाय चल रहा था।
कोर्ट ने राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट, स्केच मैप और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि अधिकारी अपनी सीमा से बाहर चले गए थे। सरकारी प्लॉट से अतिक्रमण हटाना था, लेकिन याचिकाकर्ताओं की निजी वैध संपत्ति को भी गिरा दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह विध्वंस “बिना किसी वैध कानूनी अधिकार” के किया गया।
कलकत्ता हाईकोर्ट का कहना हैं कि
- संबंधित प्राधिकरण को स्वीकृत प्लान के अनुसार नई दो मंजिला व्यावसायिक इमारत दो साल के अंदर बनानी होगी और उसका कब्जा याचिकाकर्ताओं को सौंपना होगा।
- नई इमारत तैयार होने तक प्रभावित परिवार को उसी इलाके में मुफ्त वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना होगा।
- 10 लाख रुपये का मुआवजा दो बराबर किस्तों में देना होगा—पहली किस्त 5 लाख रुपये अक्टूबर 2026 के अंतिम दिन तक और दूसरी किस्त 5 लाख रुपये फरवरी 2027 के अंतिम दिन तक।
यह आदेश प्रशासनिक अधिकारियों के लिए साफ चेतावनी है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर निजी संपत्ति को मनमाने तरीके से नहीं गिराया जा सकता। नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।
